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हर बार बदला नवीन डेविड उर्फ़ बंटी तब एक विषमबाहु त्रिकोण पढ़ता था खुद से स्वप्रेम जुदाहोकरमिलनेकावादाकरो/इकरारआनेकाज्यादाकरो.मुहब्बतमेंजीनेकायेहीचलनहै/बनोश्याममेरानामराधाधरो छेड़छाड़ कमलेश कुमारी मिले उपहारों में चैन की नींद कसूरवार आभार एक बार झूठ खुशियाँ बहुत-बहुत वक्त शोषण ये बधाई

Hindi मिले बार-बार Quotes